Kabir Ke Dohe

Kabir Ke Dohe with Meaning

संत कबीर दास जी के दोहे हमें जीवन की सच्चाई और ज्ञान सिखाते हैं। यहाँ कुछ नए और अनोखे दोहे उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं।

Kabir ke Dohe

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय

अर्थ: हमें अच्छी बातों को अपनाना चाहिए और बेकार चीजों को छोड़ देना चाहिए।

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर

अर्थ: बड़ा बनने का कोई फायदा नहीं अगर दूसरों के काम न आ सके।

जहाँ दया वहाँ धर्म है, जहाँ लोभ वहाँ पाप
जहाँ क्रोध वहाँ काल है, जहाँ क्षमा वहाँ आप

अर्थ: दया धर्म है और लोभ पाप की जड़ है।

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय

अर्थ: मीठी वाणी से दूसरों को खुशी और खुद को शांति मिलती है।

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत

अर्थ: इंसान की हार-जीत उसके मन पर निर्भर करती है।

Conclusion

कबीर के दोहे हमें जीवन में सही रास्ता दिखाते हैं। इनकी सीख आज भी उतनी ही जरूरी है।


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